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रंग हवा से यूँ टपके है जैसे शराब चुवाते हैं
आगे हो मय-ख़ाने के निकलो अहद-ए-बादा-गुसाराँ है

As if color drips from the air, like wine being sipped, Step out to the tavern, for the era of wine-drinking has arrived.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

रंग हवा से ऐसे टपक रहे हैं जैसे शराब पी जा रही हो; अब मय-खाने में निकलो, क्योंकि शराब पीने का समय आ गया है।

विस्तार

मीर तक़ी मीर ने यहाँ जुनून और मदहोशी के नशा को बड़ी खूबसूरती से बयां किया है। वह कहते हैं कि रंग हवा में ऐसे टपक रहे हैं, जैसे शराब पीते समय बूंदें टपकती हैं। और अगर आपको मयखाने से निकलना ही है, तो आपको इस मदहोश राह पर चलना होगा। यह इश्क़ के पागलपन में एक खूबसूरत समर्पण है, जो बताता है कि एक बार जब आप नशे में हो जाते हैं, तो वापसी मुमकिन नहीं होती।

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