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अंदाज़ से है पैदा सब कुछ ख़बर है उस को
गो 'मीर' बे-सर-ओ-पा ज़ाहिर है बे-ख़बर सा

Everything is born from style, he knows it all, 'Mir's style is visible, even when he seems unaware.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हर चीज़ अंदाज़ से पैदा होती है, वह सब कुछ जानता है। गो 'मीर' का अंदाज़ बिना सिर-ओ-पा (शरीर) पर भी स्पष्ट है, भले ही वह बेखबर लगे।

विस्तार

यह शेर अंदाज़ की ताकत और नज़ाकत को समझाता है। शायर कह रहे हैं कि सब कुछ, हर खबर, किसी के अंदाज़ से पैदा होती है। दूसरी लाइन में एक ऐसे शख़्स का ज़िक्र है जो पूरी तरह से सामने है, लेकिन एक बे-ख़बरी सा साया लिए हुए है। यह बताता है कि असली गहराई और समझ अक्सर ज़ाहिर न होने वाले, एक शांत अंदाज़ में छुपी होती है।

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