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सब पेच की ये बातें हैं शा'इरों की वर्ना
बारीक और नाज़ुक मू कब है उस कमर सा

These are just the complicated verses of poets, for the waist is not as delicate and graceful as that.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ये सब शायरों की बातें हैं, वर्ना कमर इतनी नाज़ुक और पेचीदा नहीं होती।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब का एक बहुत ही गहरा तंज़ है। शायर कह रहे हैं कि ये जो बहुत पेचीदा बातें हैं, ये तो सिर्फ़ शायरों के लिए हैं। क्योंकि असलियत में.... इतनी नाज़ुक और कमाल की खूबसूरती (जैसे कमर) को शब्दों में बयां करना... नामुमकिन है। यह शेर कला और कल्पना की सीमा को छूता है।

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