कब तलक धूनी लगाए जोगियों की सी रहूँ
बैठे बैठे दर पे तेरे तो मिरा आसन जला
“How long shall I remain, like a hermit burning incense, at your doorstep? My very seat has been consumed by waiting here.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं कब तक जोगियों की तरह धूनी लगाए बैठा रहूँ? तेरे दर पर बैठे-बैठे मेरा आसन जल गया।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब इश्क़, रूहानी सुकून से टकराता है। शायर पूछते हैं कि मैं कब तक जोगियों की तरह, तपस्या में लीन रहूँ?.... लेकिन जब से मैं तेरे दर के पास बैठा हूँ, मेरा अपना अस्तित्व ही जल गया है। यह कैसा प्यार है, जो सांसारिक शांति को भी राख कर देता है!
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