आशिक़ कहें जो होगे तो जानोगे क़द्र-ए-'मीर'
अब तो किसी के चाहने का तुम को चाव है
“If you are a lover, you will know the worth of 'Meer'; Now, you have a desire to be loved by someone.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आशिक़ कहें जो होगे तो आप 'मीर' का क़द्र जानोगे; अब तो किसी के चाहने की आप को चाहत है।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है। इसमें शायर अपने दर्द और अपने वजूद (existence) का इज़हार कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मेरी क़द्र.... मेरी अहमियत.... तुम्हें तब समझ आएगी, जब तुम मुहब्बत को जान लोगे। लेकिन दूसरी लाइन में वह एक कड़वा सच बताते हैं— कि आपका दिल अभी किसी और के चाहने में लगा है। यह एक बहुत ही दर्दभरा इल्ज़ाम है, जो अपनी शायरी के दम पर दिया गया है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev9 / 9
