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निकला है ऐसी ख़ाक से किस सादा-रू की ये
क़ाबिल दुरूद भेजने के है सफ़ा-ए-गुल

From what humble dust has come this one, whose countenance Is worthy of receiving the pure praise of the rose?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

यह कौन सा सादा-रूह है, जो ऐसी ख़ाक से निकला है, और जिसका चेहरा गुलाब की पंखुड़ियों पर दुआ भेजने लायक है।

विस्तार

यह शेर एक इंसान की आंतरिक सुंदरता की तारीफ करता है। शायर पूछ रहे हैं कि यह सादगी भरा चेहरा किस मिट्टी से निकला है? और जवाब यह है कि इसकी असलियत, इसकी आत्मा इतनी पाक है कि यह गुलाब की खुशबू (सफ़ा-ए-गुल) के काबिल है। यह उन लोगों की प्रशंसा है जिनकी सादगी उनके गहरे और नेक दिल को छुपाती है।

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