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तबीब-ए-सुबुक-अक़्ल हरगिज़ न समझा
हुआ दर्द-ए-'इश्क़ आह दूना दवा से

The doctor of subtle intellect never understood, / The pain of love, beyond any medicine.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

किसी भी सूक्ष्म बुद्धि के वैद्य ने कभी नहीं समझा, कि इश्क़ का दर्द किसी दवा से परे होता है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के दर्द की गहराई को समझाता है। शायर कहते हैं कि किसी भी वैद्य को... यह समझ नहीं आएगा कि प्रेम का दर्द क्या होता है। यह दर्द इतना गहरा है कि किसी भी दवा से इसका इलाज संभव नहीं है। यह दर्द रूह का होता है, जिसे सिर्फ़ एहसास से समझा जा सकता है।

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