ग़ैरों से मिल चले तुम मस्त-ए-शराब हो कर
ग़ैरत से रह गए हम यकसू कबाब हो कर
“Having met you, you are like one intoxicated with wine, While I remain, filled with pride, like a dried-up kebab.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ग़ैरों से मिल कर तुम नशे में शराब के हो, और मैं ग़ैरत से रह कर सूखे कबाब जैसा हो गया हूँ।
विस्तार
यह शेर दिल के एक बहुत गहरे दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब ने तो ग़ैरों के साथ मिलकर मस्ती करना सीख लिया, वो पूरी तरह बेफ़िक्र है। लेकिन हम, अपनी ग़ैरत और इज़्ज़त के बोझ तले दबे हुए हैं, बस एक 'यकसू कबाब' बनकर रह गए हैं। यह उस दर्द को दिखाता है जब दिल को आज़ादी चाहिए होती है, लेकिन ग़ैरत उसे बांधे रखती है।
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