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उस रू-ए-आतिशीं से बुर्क़ा सरक गया था
गुल बह गया चमन में ख़जलत से आब हो कर

From that fiery spirit, the veil slipped away, The rose spilled into the garden with shame's sweet flow.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उस आग के जुनून से पर्दा गिर गया था, और गुलाब की खुशबू शर्म के पानी बनकर बाग में बह गई।

विस्तार

यह शेर किसी नज़र की ताक़त का ज़िक्र करता है। शायर कहते हैं कि उस आतिशीं (आग जैसी) नज़र ने महज़ एक पल में बुर्क़ा सरका दिया। फूल, अपनी शर्म और भावनाओं को रोक न सका, और चमन में पानी की तरह बह गया। यह एक ऐसे समर्पण की बात है, जहाँ आकर्षण इतना गहरा हो कि इंसान का वजूद खुद को संभाल न पाए।

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