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वो फ़िक्र कर कि चाक-ए-जिगर पावे इल्तियाम
नासेह जो तू ने जामा सुलाया तो क्या हुआ

Worry about obtaining the favor of the heart, my friend; what if I draped the garment of advice upon you?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

वो फ़िक्र कर कि चाक-ए-जिगर पावे इल्तियाम; नासेह जो तू ने जामा सुलाया तो क्या हुआ। (अर्थ: इस बात की चिंता करो कि तुम्हारा दिल किसी का इल्तिमाम कैसे पाए; मैंने तुम्हें सलाह का वस्त्र पहना दिया तो क्या हुआ।)

विस्तार

यह शेर बाहरी दिखावे और दिल की सच्चाई के बीच का फर्क बताता है। शायर कहते हैं कि आप इस बात की चिंता मत कीजिए कि आपकी सलाह को कितना सुंदर जामा पहनाया गया है। असली फ़िक्र तो इस बात की होनी चाहिए... कि आपका दिल, आपका जिगर, कहीं किसी को स्वीकार्य हो पाएगा या नहीं! यह वल्नरेबिलिटी (vulnerability) का बहुत गहरा नज़रिया है।

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