Sukhan AI
ग़ज़ल

ग़म उस को सारी रात सुनाया तो क्या हुआ

ग़म उस को सारी रात सुनाया तो क्या हुआ

यह ग़ज़ल एक तरह का भावनात्मक प्रश्न है, जो यह बताता है कि किसी को अपने दुख और प्रेम की बातें पूरी रात सुनाने या बार-बार याद करने से क्या होता है। शायर यह भी कहता है कि भले ही उसने झूठे वादे किए हों, लेकिन अपने दिल का सब कुछ समर्पित कर दिया, तो क्या हुआ। यह प्रेम की गहनता और समर्पण की निरर्थकता को दर्शाता है।

गाने लोड हो रहे हैं…
00
1
ग़म उस को सारी रात सुनाया तो क्या हुआ या रोज़ उठ के सर को फिराया तो क्या हुआ
ग़म को सारी रात सुनाने या रोज़ उठकर सिर को फेरने से क्या फ़र्क़ पड़ेगा।
2
उन ने तो मुझ को झूटे भी पूछा न एक बार मैं ने उसे हज़ार जताया तो क्या हुआ
उन लोगों ने तो मुझ पर झूठा भी एक बार सवाल नहीं किया, तो मैंने उसे हज़ार बार जाहिर कर दिया तो क्या हुआ।
3
ख़्वाहाँ नहीं वो क्यूँ ही मैं अपनी तरफ़ से यूँ दिल दे के उस के हाथ बिकाया तो क्या हुआ
वह भले ही मेरे लिए नहीं थे, फिर भी मैंने अपनी तरफ़ से यूँ दिल देकर उन्हें बेच दिया, तो क्या हुआ।
4
अब सई कर सिपहर कि मेरे मूए गए उस का मिज़ाज मेहर पे आया तो क्या हुआ
अब सई कर सिपहर कि मेरे मूए गए, उस का मिज़ाज मेहर पे आया तो क्या हुआ। इसका शाब्दिक अर्थ है कि यदि प्रिय, जिसका मन मेरे वश में हो गया है, अचानक मेरे प्रति स्नेह दिखाए तो मेरा क्या होगा।
5
मत रंजा कर किसी को कि अपने तो ए'तिक़ाद दिल ढाए कर जो का'बा बनाया तो क्या हुआ
मत किसी को धोखा देना, क्योंकि तुम खुद एक विश्वास हो; भले ही दिल तोड़कर काबा बना लिया जाए, तो क्या फ़ायदा है।
6
मैं सैद-ए-नातवाँ भी तुझे क्या करूँगा याद ज़ालिम इक और तीर लगाया तो क्या हुआ
अगर मैं, जो नज़्में लिखने का माहिर हूँ, तुझे याद भी नहीं करूँगा, तो क्या होगा? ज़ालिम, अगर तू एक और तीर मारेगा, तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा।
7
क्या क्या दुआएँ माँगी हैं ख़ल्वत में शैख़ यूँ ज़ाहिर जहाँ से हाथ उठाया तो क्या हुआ
शैख़ से पूछ रहा है कि खलवत में कौन-सी दुआएँ माँगी गई हैं, और अगर वे दुआएँ दुनिया के दृश्य जगत से हाथ उठाए जाएँ, तो क्या होगा।
8
वो फ़िक्र कर कि चाक-ए-जिगर पावे इल्तियाम नासेह जो तू ने जामा सुलाया तो क्या हुआ
वो फ़िक्र कर कि चाक-ए-जिगर पावे इल्तियाम; नासेह जो तू ने जामा सुलाया तो क्या हुआ। (अर्थ: इस बात की चिंता करो कि तुम्हारा दिल किसी का इल्तिमाम कैसे पाए; मैंने तुम्हें सलाह का वस्त्र पहना दिया तो क्या हुआ।)
9
जीते तो 'मीर' उन ने मुझे दाग़ ही रक्खा फिर गोर पर चराग़ जलाया तो क्या हुआ
यदि मैं जीवित रहता, तो मीर ने मुझ पर केवल दाग ही रखा; फिर भी, यदि मैंने गौर पर दीपक जलाया तो क्या हुआ।
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.

ग़म उस को सारी रात सुनाया तो क्या हुआ | Sukhan AI