मत रंजा कर किसी को कि अपने तो ए'तिक़ाद
दिल ढाए कर जो का'बा बनाया तो क्या हुआ
“Do not deceive anyone, for you are yourself a trust; even if one builds a Kaaba by breaking hearts, what good is it?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मत किसी को धोखा देना, क्योंकि तुम खुद एक विश्वास हो; भले ही दिल तोड़कर काबा बना लिया जाए, तो क्या फ़ायदा है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी बात कहता है... यह हमें आगाह करता है कि किसी को दुख न पहुँचाएँ, क्योंकि आपकी अपनी आस्था, आपका अपना 'ए'तिक़ाद' बहुत नाज़ुक है। शायर जी ने यहाँ काबा का उदाहरण दिया है। काबा को दिल से बनाना... इसका मतलब है कि आपका जो विश्वास है, वह कितना भी बड़ा क्यों न लगे, वह दिल की नज़ाकत से जुड़ा है। यह एक बहुत ही संवेदनशील चेतावनी है।
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