है अब काम दिल जिस पे मौक़ूफ़ तो
वो नाला कि जिस में असर कुछ नहीं
“If the heart is now dependent on a task, it is like a stream that has no effect.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
यदि दिल अब किसी कार्य पर निर्भर है, तो वह उस नाले के समान है जिसमें कोई असर नहीं है।
विस्तार
यह शेर दिल की नाज़ुक हालत और उसकी भावनात्मक निर्भरता पर बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि अगर हमारे दिल का सुकून किसी बाहरी चीज़, किसी महबूब या किसी वक़्त के सहारे टिका हो... तो वह सहारा बहुत मज़बूत होना चाहिए। अगर वह असर खो दे, तो दिल का पूरा ढाँचा ढह जाता है। यह हमें सिखाता है कि सुकून कहीं बाहर नहीं, बल्कि अपने अंदर खोजना पड़ता है।
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