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कमर उस की रश्क रग-ए-जाँ है 'मीर'
ग़रज़ इस से बारीक-तर कुछ नहीं

Her waist is the envy of my very life, O Meer, Nothing could be finer or more subtle than this.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उसकी कमर मेरी जान की रश्मि ईर्ष्या है, मीर। मुझसे बारीक कुछ भी नहीं हो सकता।

विस्तार

यह शेर बताता है कि इश्क़ की तलब कितनी गहरी और नाज़ुक होती है। शायर कहते हैं कि महबूबी की कमर.... मेरे लिए किसी भी चीज़ से ज़्यादा क़ीमती, मेरी जान की रश्क है। यह महज़ एक शारीरिक वर्णन नहीं है, बल्कि उस चाहत की पराकाष्ठा है जो किसी चीज़ को इतना नज़दीक महसूस कराती है कि वह जीवन का हिस्सा बन जाती है। यह इश्क़ की सबसे बारीक, सबसे नाज़ुक ग़रज़ है।

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