नाम हैं ख़स्ता-ओ-आवारा-ओ-बदनाम मिरे
एक 'आलम ने ग़रज़ मुझ को कहा क्या क्या कुछ
“My name is a blend of worn-out, wandering, and infamous; / What did the world, in its desires, ask of me?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरा नाम घिसा-पिटा, आवारा और बदनाम है; / दुनिया ने अपनी इच्छा से मुझसे क्या-क्या कुछ कहा।
विस्तार
यह शेर शायर की गहरी निराशा और दुनिया के सामने अपनी टूटी हुई पहचान को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि मेरी शोहरत अब घिस चुकी है, मैं आवारा और बदनाम हो चुका हूँ। ऐसा क्यों? क्योंकि इस पूरे 'आलम' ने मुझ पर इतने सारे अनुभव और बातें थोप दी हैं कि मेरा वजूद ही बिखर गया है। यह दुनिया के लगातारjudgment का दर्द है।
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