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हर सफ़्हे में है महव-ए-कलाम अपना दस जगह
मुसहफ़ को खोल देख टक अंदाज़ बात का

In every page, my love for poetry is found ten times over, Open the scripture and see the style of conversation.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हर पन्ने पर मेरा कविता का प्रेम दस बार है, मुसहाफ़ा खोलो और बात का अंदाज़ देखो।

विस्तार

यह शेर दरअसल बात करता है कि कलाम की महक, शब्दों का जादू, कहीं एक जगह सीमित नहीं है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि यह महव-ए-कलाम हर पन्ने पर दस जगहों पर मौजूद है। जब वो मुसहफ़ की ओर इशारा करते हैं, तो वो सिर्फ़ शायरी की बात नहीं कर रहे होते.... बल्कि ये बता रहे होते हैं कि इल्म और नबूवत की ज़ुबान में भी एक अनोखी, क़ायम और शाश्वत बात होती है!

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