बिज़्ज़ात है जहाँ में वो मौजूद हर जगह
है दीद चश्म-ए-दिल के खुले ऐन ज़ात का
“In every place in the world, that dignity resides, It is the sight of the Self, revealed through the heart's eye.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जहाँ हर जगह वो सम्मान मौजूद है, वह दिल की आँख से खुले स्वरूप का दर्शन है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने 'इज्ज़त' के एक गहरे पहलू को समझाया है। शायर कहते हैं कि सच्ची इज़्ज़त कहीं बाहरी चीज़ों में नहीं होती, बल्कि वह हमारे दिल की खुली आँख में होती है। यह खुली आँख, आत्म-ज्ञान और सच्चाई का प्रतीक है। मिर्ज़ा तक़ी मीर हमें सिखाते हैं कि हमारी सबसे बड़ी इज़्ज़त हमारे अंदर, हमारे अपने वजूद में बसती है।
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