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काव-कावे मिज़ा-ए-यार ओ दिल-ए-ज़ार-ओ-नज़ार
गुथ गए ऐसे शिताबी कि छुड़ाया न गया

The lover's mood and the heart of sorrow and sight, Are so entangled that they could not be separated.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

काव-कावे मिज़ा-ए-यार और दिल-ए-ज़ार-ओ-नज़ार (प्रेमी का मिज़ाज और दुख तथा देखने का मन), इतने उलझ गए हैं कि उन्हें अलग नहीं किया जा सका।

विस्तार

यह शेर प्रेम और विरह के गहरे जुड़ाव को बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि महबूब का मिज़ाज और दिल का ज़ार-ओ-नज़र (ग़म से भरा नज़ारा) इतने गुँथ गए हैं कि उन्हें अलग करना नामुमकिन है। यह उस एहसास को छूता है जब हमारा वजूद, हमारे इश्क़ से इतना जुड़ जाता है कि हम खुद को अलग नहीं कर पाते।

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