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वहशत से मेरी यारो ख़ातिर न जम्अ' रखियो
फिर आवे या न आवे नौ पुर उठा जो घर से

For my friends, do not keep a gathering in fear; whether it comes or not, a new house will be built from the ashes.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

वहशत से मेरी यारों की ख़ातिर न जमा करो, क्योंकि चाहे वह आए या न आए, घर से एक नया नगर उठेगा।

विस्तार

यह शेर एक गहरी विदाई और भावनात्मक बेपरवाही को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि मेरी याद को दोस्तों के लिए मत रखना.... क्योंकि चाहे मैं वापस आऊं या न आऊं, यह दुनिया (शहर) तो अपनी राह पर चलती रहेगी। यह एहसास दिलाता है कि इंसान के रिश्ते कितने क्षणभंगुर होते हैं।

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