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किस को हर दम है लहू रोने का हिज्राँ में दिमाग़
दिल को इक रब्त सा है दीदा-ए-ख़ूँ-बार के साथ

For whom is there always the sorrow of separation in the blood, a mind, For the heart holds a bond with the gaze of the beloved's face.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

किसको हर पल खून बहने के ग़म में दिमाग़, दिल को तो एक रिश्ता है दीदा-ए-ख़ूँ-बार के साथ।

विस्तार

यह शेर विरह (separation) और प्रेम की उस मादक शक्ति को बयां करता है, जो रूह तक उतर जाती है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि विरह का दर्द तो सामान्य है, लेकिन असली और सबसे गहरा दर्द तो उस नज़ारे में है जो महबूब की आँखों से मिलता है। यह एक ऐसा बंधन है, जो सिर्फ़ देखने से ही बन जाता है—एक रब्त जो खून के रिश्ते जैसा है।

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