ऐ शोर-ए-क़यामत हम सोते ही न रह जावें
इस राह से निकले तो हम को भी जगा जाना
“Oh, that we should not remain sleeping in the clamor of doomsday, If we leave this path, then wake us up too.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ऐ क़यामत के शोर में हम सोते न रह जाएँ, अगर हम इस रास्ते से निकलें तो हमें भी जगा देना।
विस्तार
यह शेर एक गहरे अहसास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि हम इस दुनिया में इतने आरामदायक 'नींद' में जी रहे हैं कि हमें शायद सच्चाई का पता ही न चले। 'क़यामत का शोर' उस सच्चाई को दर्शाता है जो हमें जगाना चाहती है। यह एक तरह की गुहार है कि अगर सब कुछ बदल जाए, या आप दूर चले जाएँ, तो कम से कम हमें यह एहसास हो कि हम अब भी ज़िंदा हैं!
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