जिंस-ए-गिराँ को तुझ से जो लोग चाहते हैं
वे रोग अपने जी को नाहक़ बसाहते हैं
“The heavy desires that people have for you, Are the very diseases they cultivate within themselves.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिंस-ए-गिराँ को तुझ से जो लोग चाहते हैं, वे रोग अपने जी को नाहक़ बसाते हैं। इसका अर्थ है कि जो लोग आप से भारी चाहत रखते हैं, वे स्वयं अपने दिल में अनचाहे रोग (या कष्ट) बसा लेते हैं।
विस्तार
यह शेर उस आत्म-विनाशकारी प्रवृत्ति की बात करता है जो अधूरी इच्छाओं से पैदा होती है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति किसी से कोई बहुत ऊँचा, कठिन या असंभव चीज़ मांगता है, तो उसे वह चीज़ नहीं मिलती। बल्कि, उस मांग करने की प्रक्रिया में ही वह अपने दिल में एक तरह का रोग या बेचैनी पाल लेता है। यह अपेक्षाओं की कीमत को समझाता है।
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