न तुझ बिन होश में हम आए साक़ी
मुसाफ़िर ही रहे अक्सर वतन में
“O Saqi, without you, we returned to consciousness, The traveler often remains in his own homeland.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
साक़ी, तुम्हारे बिना हम होश में तो आए, पर मुसाफ़िर अक्सर अपने वतन में ही रह गए।
विस्तार
यह शेर उस गहरे अकेलेपन को बयां करता है जब दिल कहीं और होता है.... आप साक़ी से कह रहे हैं कि मैं होश में नहीं आया.... मैं तो पूरी तरह से मदहोश था। और सबसे दर्दनाक बात यह है कि जब आप अपने ही घर (वतन) में होते हैं.... तब भी आप खुद को एक मुसाफ़िर, एक अजनबी जैसा महसूस करते हैं! यह इश्क़ के वह दर्द हैं, जो इंसान को अपने ही वजूद से बेगाना कर देते हैं।
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