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ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा
दुश्मन के भी दुश्मन पर ऐसा न हुआ होगा

O friend, no one has been disgraced like me, Nor has such a thing happened even to an enemy's foe.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे दोस्त, कोई मुझ जैसा रुस्वा न हुआ होगा, दुश्मन के भी दुश्मन पर ऐसा न हुआ होगा।

विस्तार

यह शेर महज़ एक शिकायत नहीं है, बल्कि एक दिल का दर्द है। शायर जी बता रहे हैं कि उनका रुस्वाई का आलम इतना गहरा है कि यह किसी दुश्मन के हाथ का अपमान नहीं है। यह तो ऐसा अपमान है कि दुश्मन का दुश्मन भी आज उन्हें ताने मार रहा है। यह पंक्ति बताती है कि जब किसी इंसान की गिरहें टूट जाती हैं, तो उसका दर्द कितना असहनीय होता है। एक बहुत ही गहरा एहसास है यह।

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