अब अश्क-ए-हिनाई से जो तर न करे मिज़्गाँ
वो तुझ कफ़-ए-रंगीं का मारा न हुआ होगा
“He who does not get wet from the tears of henna, Never has been struck by your colored palm.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अब अश्क-ए-हिनाई से जो भी न तर हो मिज़्गाँ, उसने कभी तुम्हारे रंगीन कफ़ का वार झेला न होगा।
विस्तार
इस शेर में शायर ने इश्क़ के गहरे दर्द को बयान किया है। वो कह रहे हैं कि अगर आँखों में हिना के आँसुओं की नमी न आई हो, तो इसका मतलब है कि आँखों ने महबूब के रंगीन स्पर्श का एहसास कभी नहीं किया। यह दर्द और मोहब्बत के रिश्ते को बहुत खूबसूरती से समझाता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
