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अफ़्सोस की भी चश्म थी उन से ख़िलाफ़-ए-अक़्ल
बार-ए-इलाक़ा से तो 'अबस पुश्त-ए-ख़म हुआ

Even the regret had a lens against them, contrary to reason; from the flood of affection, 'Abas' became behind the curtain.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अफ़सोस की भी चश्म थी उनसे ख़िलाफ़-ए-अक़्ल; बार-ए-इलाक़ा से तो 'अबस' पुश्त-ए-ख़म हुआ।

विस्तार

यह शेर उन भावनाओं को बयां करता है जो तर्क की सीमा से परे होती हैं। शायर कहते हैं कि अफ़सोस में भी एक ऐसी नज़र थी जो समझ से अलग थी। लेकिन महबूब के इलाक़े को छोड़ना... ये घाव इतना गहरा था कि यह दिल की रूह तक उतर गया। यह उस दर्द को बयान करता है, जहाँ कोई तर्क़ भी सहारा नहीं दे पाता।

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