है कौन आप में जो मिले तुझ से मस्त नाज़
ज़ौक़-ए-ख़बर ही ने तो हमें बे-ख़बर क्या
“What is it in you that I find in you, this intoxicated grace? For the mere flavor of news, why are we rendered unaware?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आप में कौन सी ऐसी बात है जो मुझे तुमसे मस्तानी लगती है? सिर्फ खबर के स्वाद से हमें अनजान क्यों किया जा रहा है?
विस्तार
ये शेर महबूब के जादू और इश्क़ की उस नशीली हालत को बयान करता है, जहाँ अफ़साना ही काफ़ी है। शायर कहते हैं कि आप में ऐसा क्या ख़ास है कि आप हमें इतना मदहोश कर देते हैं? असल में, जानने की चाहत से ज़्यादा मज़ा तो उस अनजानेपन में है, जो हमें बेख़बर रखता है। यह इश्क़ के उस रंग है, जहाँ नज़ारा ही सब कुछ है।
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