अब ख़राबा हुआ जहानाबाद
वर्ना हर इक क़दम पे याँ घर था
“Now Jahanabad is in ruins, For every step, there was a home.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अब जहानाबाद ख़ाक हो गया है, जबकि हर क़दम पर एक घर हुआ करता था।
विस्तार
यह शेर किसी पूरे दौर या दुनिया के ढह जाने की बात करता है। जहानाबाद एक दौर का नाम है, जो कभी बहुत जीवंत और सुरक्षित था। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि सबसे बड़ा दुःख सिर्फ तबाही नहीं है, बल्कि यह एहसास है कि वह दुनिया, जहाँ हर कदम पर एक ठहराव और सुरक्षा थी, अब कहीं नहीं रही। यह एक खोए हुए गौरव और बेबस नियति का विलाप है।
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