बे-ज़री का न कर गिला ग़ाफ़िल
रह तसल्ली कि यूँ मुक़द्दर था
“Do not mourn the lack of adornment, oblivious one; Be content that such was your destiny.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बिना ज़री का न कर गिला ग़ाफ़िल, यह समझकर संतुष्ट रह कि ऐसा ही तुम्हारा मुक़द्दर था।
विस्तार
यह शेर हमें जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई सिखाता है—यानी इक़बाल और तसल्ली। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि ज़िंदगी की सादगी या कमी पर शिकायत मत करना। बल्कि, हमें ये तसल्ली रखनी चाहिए कि जो भी हुआ, वह तो बस क़िस्मत का लिखा था। यह एक गहरा एहसास है कि सुकून शिकायत करने में नहीं, बल्कि क़ुबूलियत में है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
