इक वक़्त हम को था सर-ए-गिर्या कि दश्त में
जो ख़ार ख़ुश्क था सौ वो तूफ़ाँ रसीदा था
“In a time when we were overwhelmed by grief in the wilderness, The dried thorn bush was the hundred-fold storm that arrived.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
एक समय ऐसा था जब हम दुःख के सागर में थे, कि उस वीराने में जो सूखा काँटा था, वह सौ गुना बड़ा तूफ़ान बनकर आया।
विस्तार
इस शेर में शायर ने ग़म को एक बहुत ही खूबसूरत रूपक (metaphor) में बयान किया है। शायर कह रहे हैं कि हम पहले से ही आँसुओं के रेगिस्तान में जी रहे थे, यानी दिल का दर्द पहले से बहुत गहरा था। जब कोई तूफ़ान आता है, तो वह दर्द नहीं देता; वह तो बस उस पहले से मौजूद दर्द को और बढ़ा देता है—जैसे सूखे काँटे! यह बताता है कि कई बार, सबसे बड़ी मुसीबत भी पहले से जमे हुए ग़म का ही परिणाम होती है।
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