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कोरी चश्म क्यूँ न ज़ियारत को उस की आए
यूसुफ़ सा जिस को मद्द-ए-नज़र नूर-दीदा था

Why not visit that one, whose presence is a mere glimpse, Like Joseph, whom the help of a glance illuminated.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

कोरी चश्म से उस की ज़ियारत क्यों न आए, जैसे यूसुफ़ को नज़र के सहारे नूर-दीदा हुआ था।

विस्तार

यह शेर सवाल करता है कि सच्ची तड़प और विरह की भावना कहाँ है। शायर कहते हैं कि आँखें, जो महबूब की ज़ियारत के लिए खाली नहीं होनी चाहिए, वे खाली क्यों हैं। वह यूसुफ़ (Prophet Joseph) से तुलना करते हैं, जिन्हें नज़रों का नूर-ए-दीदा मिला था। इसका मतलब है कि जब रूह को इल्म और इश्क़ मिलता है, तब भी उस एहसास को ज़ाहिर करना कितना मुश्किल होता है।

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