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क्या कुछ न था अज़ल में न ताला जो थे दुरुस्त
हम को दिल-ए-शिकस्ता क़ज़ा ने दिला दिया

Was there nothing in eternity, no lock that was intact, It was the decree of fate that gave us a broken heart.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अर्थात्, अज़ल में कुछ भी ऐसा नहीं था, कोई भी ताला जो सुरक्षित हो; यह दिल-ए-शिकस्ता (टूटा दिल) का मिलना क़ज़ा (किस्मत/भाग्य) ने हमें दिलवा दिया।

विस्तार

यह शेर नियति और दर्द के अटूट संबंध को समझाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि दिल का टूटना कोई आकस्मिक घटना नहीं है, यह तो एक पूर्व-निर्धारित सत्य है। शायर सवाल करते हैं कि क्या कोई ऐसी पीड़ा है जो अनादि काल से हमारे लिए लिखी नहीं गई थी? यह शेर बताता है कि दुःख और तड़प होना, शायद क़ज़ा का ही दिया हुआ तोहफ़ा है।

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