ग़ज़ल
आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
सहर की आह ने दिल की जलन को मिटा दिया। जैसे सुबह की हवा ने सब कुछ शांत कर दिया, वैसे ही समय के बदलाव ने जीवन के गहरे घावों को भी शांत कर दिया। यह ग़ज़ल बताती है कि कैसे समय का आना और प्रकृति का प्रभाव, जीवन के कष्टों और प्रेम के उत्कट भावों को धीरे-धीरे शांत कर देता है।
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1
आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
उस बाव ने हमें तो दिया सा बुझा दिया
सुबह की आह ने दिल की जलन को मिटा दिया; / उस पागल प्रेमी ने हमें बस बुझा दिया।
2
समझी न बाद-ए-सुब्ह कि आ कर उठा दिया
इस फ़ित्ना-ए-ज़माना को नाहक़ जगा दिया
समझ नहीं पाई कि सुबह की हवा आकर इस ज़माने के फ़ितने को व्यर्थ ही जगा गई।
3
पोशीदा राज़-ए-'इश्क़ चला जाए था सौ आज
बे-ताक़ती ने दिल की वो पर्दा उठा दिया
पर्दे के पीछे छिपा प्रेम का राज़ आज सौ दिन तक चला था, जो दिल की कमज़ोरी के कारण खुल गया।
4
उस मौज-ख़ेज़ दहर में हम को क़ज़ा ने आह
पानी के बुलबुले की तरह से मिटा दिया
उस मस्ती भरे समय में, किस्मत ने हमें पानी के बुलबुले की तरह मिटा दिया।
5
थी लाग उस की तेग़ को हम से सौ 'इश्क़ ने
दोनों को मा'रके में गले से मिला दिया
शायर कहता है कि जैसे उसकी कृपा के कारण, प्रेम ने हमें और उस को घायल करके भी गले लगा लिया।
6
सब शोर-ए-मा-ओ-मन को लिए सर में मर गए
यारों को इस फ़साने ने आख़िर सुला दिया
दुनिया और दिल के शोर को सिर पर लिए मर गए, इस कहानी ने आखिरकार दोस्तों को सुला दिया।
7
आवारगान-ए-इश्क़ का पूछा जो मैं निशाँ
मुश्त-ए-ग़ुबार ले के सबा ने उड़ा दिया
जब मैंने प्रेम के गीत का निशान पूछा, तो सुबह की हवा ने धूल के गुच्छे से उसे उड़ा दिया।
8
अज्ज़ा बदन के जितने थे पानी हो बह गए
आख़िर गुदाज़ 'इश्क़ ने हम को बहा दिया
अज्ज़ा बदन के जितना पानी था, वह बह गया; आख़िर इश्क़ की धारा ने हमको बहा दिया।
9
क्या कुछ न था अज़ल में न ताला जो थे दुरुस्त
हम को दिल-ए-शिकस्ता क़ज़ा ने दिला दिया
अर्थात्, अज़ल में कुछ भी ऐसा नहीं था, कोई भी ताला जो सुरक्षित हो; यह दिल-ए-शिकस्ता (टूटा दिल) का मिलना क़ज़ा (किस्मत/भाग्य) ने हमें दिलवा दिया।
10
गोया मुहासबा मुझे देना था 'इश्क़ का
उस तौर दिल सी चीज़ को मैं ने लगा दिया
शायर कहता है कि जैसे उसे इश्क़ का हिसाब देना था, इसलिए उसने अपने दिल की चीज़ किसी और चीज़ में लगा दी।
11
मुद्दत रहेगी याद तिरे चेहरे की झलक
जल्वे को जिस ने माह के जी से भुला दिया
तुम्हारे चेहरे की झलक की याद बहुत समय तक रहेगी, उस आकर्षण के लिए जिसने मुझे महीनों का समय भुला दिया।
12
हम ने तो सादगी से किया जी का भी ज़ियाँ
दिल जो दिया था सो तो दिया सर जुदा दिया
हमने तो सादगी से किया जी का भी ज़ियाँ। दिल जो दिया था वो तो दिया, सर जो जुदा दिया वो भी दिया।
13
बोई कबाब सोख़्ता आई दिमाग़ में
शायद जिगर भी आतिश-ए-ग़म ने जिला दिया
दिमाग़ में कबाब की खुशबू फैल गई, और शायद मेरे जिगर को भी ग़म की आग ने ज़िंदा कर दिया।
14
तकलीफ़ दर्द-ए-दिल की 'अबस हम-नशीं ने की
दर्द-ए-सुख़न ने मेरे सभों को रुला दिया
तकलीफ़ दर्द-ए-दिल की 'अबस हम-नशीं ने की, दर्द-ए-सुख़न ने मेरे सभों को रुला दिया। इसका शाब्दिक अर्थ है कि दिल का दर्द हमनशीं (साथी) ने दिया, और शायरी (कविता) के दर्द ने हम सबको रुला दिया।
15
उन ने तो तेग़ खींची थी पर जी चला के 'मीर'
हम ने भी एक दम में तमाशा दिखा दिया
उन लोगों ने तो बहुत तैयारी की थी, पर 'मीर' ने अपनी शायरी से तुरंत एक बड़ा तमाशा खड़ा कर दिया।
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