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खुलती है जब आँख शब को तुझ बिन
कटती नहीं आती फिर नज़र रात

When the eye opens at night, without you, The gaze does not break, even through the night.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जब आँखें रात को तेरे बिना खुलती हैं, तब नज़र रात भर नहीं रुकती।

विस्तार

यह शेर जुदाई के दर्द और रातों की बेचैनी को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जब आँखें रात के सन्नाटे में खुलती हैं, तो महबूब की याद इतनी हावी होती है कि नज़र को रात से कोई छुटकारा नहीं मिलता। यह एक ऐसी बेचैनी है, जो नींद और सुकून दोनों छीन लेती है।

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