हम भी फिरते हैं यक हशम ले कर
दस्ता-ए-दाग़-ओ-फ़ौज-ए-ग़म ले कर
“We too wander, carrying the cup of sorrow, and the hand of blemishes and armies of grief.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हम भी एक हशम लेकर फिरते हैं, जिसमें दाग़ (निशान) और ग़म की फौज का दस्ता (हाथ) है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की गहरी भावना को बयां करता है। शायर कहते हैं कि वो भी कहीं न कहीं इतराते हुए चलते हैं.... लेकिन उनके साथ क्या है? दाग़ों का बंडल और ग़म की पूरी फौज! यह न सिर्फ़ एक दर्द है, बल्कि उस दर्द को एक अजीब से स्वाभिमान के साथ जीने का एहसास है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
1 / 10Next →
