बारहा सैद-गह से उस की गए
दाग़-ए-यास आहु-ए-हरम ले कर
“From the garden of Barha Said, the stain of despair, taking the fire of the sanctuary.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बारहा सैद-गह से उस की गए, दाग़-ए-यास आहु-ए-हरम ले कर। इसका अर्थ है कि बारहा सैद के बाग से उस (किसी) के दाग़ (निशान) और यास (निराशा) के साथ, हरम (पवित्र स्थान) की आग लेकर गए।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ जगह छोड़ने की बात नहीं करता, यह दिल के बोझ की बात करता है। शायर कहते हैं कि भले ही आप किसी पवित्र जगह को छोड़कर चले जाएं, लेकिन निराशा का दाग़ और उस जगह की यादों का जलता अहसास आपके साथ हमेशा रहेगा। यह बताता है कि कुछ दर्द इतने गहरे होते हैं कि वे रूह का हिस्सा बन जाते हैं।
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