दीदा-ए-तर पे शब रखा था 'मीर'
लुक्का-ए-अब्र है मिरा रूमाल
“On the bed of the beloved, I spent the night, 'Mir', My handkerchief is the curtain of the cloud.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रियतम के बिस्तर पर रात गुज़ारी थी, 'मीर'। मेरा रुमाल बादल का पर्दा है।
विस्तार
मीर का यह शेर इश्क़ की उस गहराई को बयां करता है, जो नज़रों में बस जाती है। 'दीदा-ए-तर पे शब रखा था' का मतलब है कि महबूब की आँखों में एक रात का सा गहरा साया बस गया है। और दूसरा मिसरा बताता है कि कैसे किसी पल की याद भी हमारे साथ हमेशा के लिए रह जाती है। यह रूमाल, जो बादल के निशान से दागदार है, उस अनमोल, मगर गुज़र चुके लम्हे की निशानी है।
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