क्या हुआ गर ग़ज़ल क़सीदा हुई
आक़िबत क़िस्सा-ए-मोहब्बत है
“What happened, that the ghazal turned into a qasida; / The end result is merely a story of love.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या हुआ कि ग़ज़ल क़सीदा बन गई; / आख़िरत बस इश्क़ की कहानी निकली।
विस्तार
यह शेर बताता है कि मोहब्बत का किस्सा कितना गहरा और शाश्वत होता है। शायर यहाँ पूछ रहे हैं कि अगर ग़ज़ल का रूप ही बदलकर क़सीदा बन जाए, तो क्या होगा? जवाब तो दिल में है... आक़िबत तो बस मोहब्बत की कहानी ही रहेगी। इसका मतलब है कि कला का रूप बदलेगा, लेकिन इश्क़ का रंग कभी नहीं बदलेगा। यह एक अमर एहसास है।
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