चश्म-ओ-दिल से जो निकला हिज्राँ में कभू बहर-ओ-कान से निकला

From the eye of the heart, which emerged in separation, It never emerged from the ear of the ocean.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

दिल की आँखों से जो विरह में निकला, वह कभी सागर के कानों से नहीं निकला।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है जो इतना गहरा होता है कि उसे लफ़्ज़ों में बयां करना नामुमकिन है। शायर कहते हैं कि जो दर्द आँखें और दिल महसूस करते हैं, जो विरह में निकलता है, वह न तो लहरों के शोर से निकला जा सकता है, और न ही कानों की आवाज़ से। यह एक आंतरिक, अनकहा दर्द है!

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पाठ
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