ये 'मीर'-ए-सितम-कुश्ता किसू वक़्त जवाँ था
अंदाज़-ए-सुख़न का सबब शोर ओ फ़ुग़ाँ था
“O 'Mir-e-Sitam-Kushta', at some point, you were young, Your manner of poetry was the cause of much noise and grief.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे 'मीर-ए-सितम-कुश्ता', तू कभी युवा था, इसलिए तेरे काव्य-अंदाज़ के कारण बहुत शोर और दुःख हुआ।
विस्तार
यह शेर एक शायर के शुरुआती दौर की बात करता है। मीर कहते हैं कि जब मैं जवान था, तो मेरी शायरी का अंदाज़.... वो शोर और वो फ़ुग़ाँ, ये सब इसी वजह से था। यानी, जब किसी कलाकार के अंदर बहुत ज़्यादा भावनाएँ उमड़ती हैं, जब जीवन में उथल-पुथल होती है, तो उसी दर्द से कला जन्म लेती है। यह एहसास बहुत गहरा है।
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