जादू की पुड़ी पर्चा-ए-अबयात था उस का
मुँह तकिए ग़ज़ल पढ़ते अजब सेहर-बयाँ था
“It was a scroll of verses, a magic magic, that was his, / Reading ghazals till his mouth, a wondrous, strange narration.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
उसका मुँह जादू की पुड़ी जैसा पर्चा था जिसमें वो अजब सेहर-बयाँ ग़ज़लें पढ़ता था।
विस्तार
यह शेर किसी बहुत ही कलाम-ए-ख़ास, किसी बेहतरीन शायर की तारीफ़ है। शायर कहते हैं कि उस शख़्स के लफ़्ज़ों का पर्चा जादू जैसा है, यानी उनके अल्फ़ाज़ में कोई नशा है। और जब वह ग़ज़ल पढ़ते हैं, तो उनकी आवाज़ किसी नई सुबह की तरह ताज़गी और रौशनी से भरी होती है। यह वक़्त और बयान की तारीफ़ है।
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