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किस ज़ोर से फ़रहाद ने ख़ारा-शिकनी की हर-चंद कि वो बेकस बे-ताब-ओ-तवाँ था

With what force did Farhad perform the act of longing, That he was lifeless, unspirited, and without power?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

फ़रहाद ने किस ज़ोर से ख़ारा-शिकनी की, कि हर-चंद वह बेकस, बे-ताब और बे-तवाँ हो गया था।

विस्तार

ये शेर एक गहरे विरोधाभास को सामने लाता है। शायर पूछ रहे हैं कि फ़रा़हद ने ये ख़ारा-शिकनी, ये जो बड़े-बड़े कृत्य किए, वो किस ज़ोर से किए.... जब वो खुद बेकस, बेताब और बे-तवाँ थे। ये सवाल सिर्फ़ प्रेम की शक्ति पर नहीं है, बल्कि उस जुनून पर है जो टूटे हुए इंसान को भी महान कार्य करने पर मजबूर कर देता है।

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