“With people's growth, why not always called immortal? When I look close, 'tis not a banyan, but a forest.”
लोगों की वृद्धि के साथ, इसे हमेशा अमर क्यों न कहा जाए? जब मैं करीब से देखता हूँ, तो यह एक बरगद नहीं, बल्कि एक वन है।
यह दोहा पूछता है कि जब प्रजा बढ़ती है, तो उसे अमर क्यों नहीं कहा जाता? फिर यह एक सुंदर उपमा देता है: जब आप किसी बरगद के पेड़ को ध्यान से देखते हैं, तो आप केवल एक पेड़ नहीं देखते, बल्कि बरगदों का पूरा जंगल देखते हैं। इसका अर्थ है कि सच्ची अमरता या विशालता सामूहिक विकास और विस्तार से आती है। जैसे एक बरगद का पेड़ अपनी जड़ों और शाखाओं को फैलाकर एक हमेशा बढ़ने वाला उपवन बनाता है, वैसे ही लोगों की शक्ति और संख्या एक इकाई या विचार को शाश्वत और असीमित बना सकती है, जो उसके मूल एकल स्वरूप से कहीं आगे जाती है। यह एकता और स्थायी विरासत के बारे में एक गहरा विचार है।
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