“In dense darkness, as deep wonders spring,Listening to the springs, 'chhan-chhan,' softly sing.From all of this, who wouldn't, struck with such awe,Praise nature profusely, without any flaw?”
घनी अँधेरे में, जब गहरे झरने 'छण-छण' की आवाज़ करते हुए फूटते हैं, तो इन सबसे विस्मित होकर कौन प्रकृति की अत्यधिक प्रशंसा नहीं करेगा?
सोचिए एक गहरी, अंधेरी रात का सन्नाटा। ऐसे में, झरनों से बहती पानी की 'छन-छन' की गहरी, मधुर ध्वनि सुनाई दे रही हो। यह दोहा पूछता है कि ऐसी अद्भुत और मनमोहक प्राकृतिक आवाज़ सुनकर कौन विस्मय और प्रशंसा से भर नहीं जाएगा? यह बताता है कि प्रकृति की सुंदरता और उसके शांत संगीत में इतनी शक्ति है कि वह हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है और हमें उसके प्रति कृतज्ञता और प्रशंसा से भर देती है।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
