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શબ્દો લાગે દૂર થકી થતા માછીના મિષ્ટ કાને,
વાયુ આવે ફરફર વળી એ મજો કોણ જાણે?

Words, from afar, become sweet to the fisher's ear,The wind comes rustling again, who knows that joy so clear?

नर्मद
अर्थ

दूर से आते शब्द मछुआरे के कान को मधुर लगते हैं, और हवा फिर से सरसराती हुई आती है। इस आनंद को कौन जान सकता है?

विस्तार

यह दोहा शांति और सूक्ष्म आनंद का एक सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि कैसे दूर से आती हुई आवाजें या शब्द, एक मछुआरे के कानों तक पहुँचते हैं और उसे बहुत मधुर लगते हैं। कल्पना कीजिए, पानी के किनारे बैठे हुए, और दूर की आवाजें एक मधुर धुन बन रही हों। फिर, कविता में हवा की हल्की सरसराहट भी जुड़ जाती है, जो इस शांत माहौल को और बढ़ा देती है। कवि पूछते हैं, "उस गहरे आनंद को कौन जानता है?" यह बताता है कि शांति और खुशी का यह गहरा एहसास, जो दूर की आवाजें सुनने और हवा के हल्के झोंके महसूस करने जैसे साधारण पलों में मिलता है, एक अनोखा और अनमोल अनुभव है, जिसे शायद वही समझ पाते हैं जो इसे जीते हैं। यह प्रकृति की शांति में गहरा आनंद खोजने के बारे में है।

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