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ધો ધો ધો ધો, ઉદક પડતું પહાણ ઉપેર ભારી,
દેખી સંધું ક્યમ ન ટટળું નાથ સારું હું નારી?

The 'dho dho dho dho' of waters, heavily on stone they fall,Seeing all this, how can I, a woman, not melt for my Lord's call?

नर्मद
अर्थ

पानी के पत्थरों पर भारी पड़ने की 'धो धो धो धो' ध्वनि सुनाई देती है। यह सब देखकर, मैं एक स्त्री होकर अपने नाथ के लिए क्यों न पिघल जाऊँ?

विस्तार

यह प्यारी पंक्ति एक अद्भुत चित्र प्रस्तुत करती है। यह कहती है, "पानी लगातार और भारी मात्रा में एक कठोर पत्थर पर गिरता है।" फिर वक्ता पूछती है, "यह सब देखकर, मैं एक नारी होकर, अपने प्रभु के लिए क्यों न पिघल जाऊँ?" मूल विचार यह है कि यदि लगातार पानी एक कठोर पत्थर को भी नरम कर सकता है, तो एक प्रेममयी भक्त, खासकर एक नारी जिसका हृदय कोमल माना जाता है, उसे तो अपने प्रभु के प्रति भक्ति में निश्चित रूप से पिघल जाना चाहिए और समर्पित हो जाना चाहिए। यह भगवान के प्रति पूर्ण भावनात्मक और आध्यात्मिक समर्पण की गहरी इच्छा की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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