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At the immortal touch of thy hands my little heart
loses its limits in joy and gives birth to utterance ineffable.

At the immortal touch of thy hands my little heart loses its limits in joy and gives birth to utterance ineffable.

रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

जब तुम्हारे अमर हाथों का स्पर्श मेरे छोटे से हृदय को छूता है, तो वह आनंद में अपनी सीमाएं खो देता है और अवर्णनीय भावनाओं को जन्म देता है।

विस्तार

यह दोहा एक गहरे आध्यात्मिक या भावनात्मक जुड़ाव के क्षण को खूबसूरती से दर्शाता है। जब किसी दिव्य या अत्यंत महत्वपूर्ण चीज़ के अमर स्पर्श का अनुभव होता है, तो हृदय असीम आनंद से भर जाता है। यह कोई सामान्य खुशी नहीं है; यह इतनी विशाल है कि सारी सीमाओं को पार कर जाती है। और इस उमड़ते हुए भाव से एक ऐसी अभिव्यक्ति जन्म लेती है जिसे शब्दों में पूरी तरह से समेटा नहीं जा सकता। यह शुद्ध, असीम आनंद से जन्मी एक पवित्र, अवर्णनीय वाणी है, जो एक ऐसे गहरे जुड़ाव को दर्शाती है जो मानवीय भाषा से परे है।

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