জানি না, জানি না কবে পাব দেখা,
এই প্রতীক্ষায় কাটে আমার দিন একা একা॥
“জানি না, জানি না কবে পাব দেখা, এই প্রতীক্ষায় কাটে আমার দিন একা একা॥”
— रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ
मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता कब मुलाक़ात होगी। इसी इंतज़ार में मेरे दिन अकेले ही कटते हैं।
विस्तार
यह दोहा अपने प्रियजन से बिछड़ने के दर्द और उनसे मिलने की गहरी लालसा को बहुत सुंदरता से व्यक्त करता है। वक्ता बार-बार कहता है, 'मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता कि मैं तुमसे कब मिल पाऊँगा,' जो उनकी अनिश्चितता और तीव्र इच्छा को दर्शाता है। वे बताते हैं कि उनके दिन अकेलेपन में बीतते हैं, केवल उस पुनर्मिलन की निरंतर प्रतीक्षा में। यह किसी ऐसे व्यक्ति का हृदयस्पर्शी चित्रण है जो अपने प्रिय को फिर से देखने की आशा में जी रहा है, और समय एकाकी अपेक्षा में धीरे-धीरे गुजर रहा है।
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