“The algae lay hidden at the water's bottom;A sunbeam thought, 'Let me go and meet it!'”
शैवाल पानी के तल में छिपा हुआ था। एक सूर्य किरण ने सोचा कि लाओ, उससे जाकर मिलूँ।
सोचिए, पानी की ठंडी, गहरी तलहटी में हरी-हरी काई छिपी बैठी है, खुद को सुरक्षित और अकेला महसूस कर रही है। लेकिन ऊपर से एक सूरज की किरण उसे देख लेती है। वह सिर्फ दूर से चमकना नहीं चाहती; बल्कि उसमें एक कोमल उत्सुकता भर जाती है, और वह सोचती है, 'अरे, वहाँ नीचे कुछ सुंदर और जीवित है! चलो मैं जाकर उससे मिलती हूँ।' यह सरल दोहा रोशनी की दृढ़ता को खूबसूरती से दर्शाता है, उसकी इच्छा कि वह जीवन के सबसे छिपे हुए रूपों को भी खोजे और पाले-पोसे। यह दुनिया के हर कोने में, चाहे वह कितना भी गहरा या अनदेखा क्यों न हो, गर्माहट और जुड़ाव लाती है।
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