વેદનાનુ નામ કયાંય હોય નહીં એમ જાણે
વેરી દઉં હોશભેર વાત;
“As if pain's name exists nowhere, I scatter words with utmost care.”
— सुरेश दलाल
अर्थ
मानो वेदना का कहीं कोई नाम ही न हो; मैं होशपूर्वक अपनी बातें बिखेर देता हूँ।
विस्तार
यह शेर दर्द से निपटने का एक अनोखा तरीका सुझाता है। यह हमें सलाह देता है कि हमें होशपूर्वक और जानबूझकर दूसरी बातें करनी चाहिए, या दूसरे विचार फैलाने चाहिए, जैसे कि दर्द का नाम कहीं है ही नहीं। यह दर्द को अनदेखा करना नहीं है, बल्कि जानबूझकर उसका नाम न लेना या उस पर ध्यान न देना है। ध्यान को जानबूझकर मोड़ने का यह प्रयास एक शक्तिशाली तरीका हो सकता है, जिससे व्यक्ति अलग विचारों और बातचीत में शामिल होकर तत्काल दुख से आगे बढ़ सकता है। यह दर्द को अपने चेतन संवाद से उसका नाम हटाकर उसकी शक्ति देने से इनकार करने जैसा है।
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